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You searched for: creator:"प्रफुल्ल कोलख्यान Prafulla Kolkhyan"
[texts]सीमांत पर हिंदी - प्रफुल्ल कोलख्यान Prafulla Kolkhyan
सीमांत पर हिंदी
Keywords: कोलख्यान,kolkhyan,hindi,हिंदी
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[texts]भाषा में भ्रांति - प्रफुल्ल कोलख्यान (Prafulla kolkhyan)
भाषा सामाजिकता की जीवनी शक्ति और सौंदर्य-शक्ति को भी सुगठित और संरक्षित करती है। लक्षित किया जा सकता है कि कैसे एक भाषा के गर्भ में पलती हुई दूसरी भाषा उससे बाहर निकलकर एक नये भाषिक प्रस्थान क...
Keywords: कोलख्यान,Kolkhyan
Downloads: 46 (1 review)
[texts]रवींद्रनाथ ठाकुर को याद करने का मतलब - प्रफुल्ल कोलख्यान (Prafulla kolkhyan)
विश्व संस्कृति की एकत्व चेतना, भक्ति साहित्य की सामाजिक चेतना और आधुनिक समय की राजनीतिक चेतना के समन्वित तत्त्व से रवींद्रनाथ ठाकुर के अद्भुत व्यक्तित्व का गठन हुआ। रवींद्रनाथ के साहित्य म...
Keywords: कोलख्यान,kolkhyan; ravindranath; bangla; alochana
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[texts]अंतःकरण का आयतन - प्रफुल्ल कोलख्यान Prafulla Kolkhyan
वृद्धि ढाँचे में होनेवाला बाहरी फैलाव है और विकास अंतर्वस्तु का आंतरिक प्रसार। यह सच है कि बाहरी ढाँचे की वृद्धि से अंतर्वस्तु के प्रसार में सहयोग प्राप्त होता है। लेकिन यह तब होता है जब वृद...
Keywords: कोलख्यान,kolkhyan; Hindi; Bhartiyta; Antahkaran
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[texts]अपने वतन में पराए - प्रफुल्ल कोलख्यान (Prafulla kolkhyan)
अपने मूल भाषा-क्षेत्र से बाहर रह कर छोटे-मोटे रोजगार और खुदरा कारोबार में लगे लोगों को निकृष्टतम अर्थों में अपने ‘बाहरी’ होने का भारी दबाव झेलना पड़ रहा है। ऐसा लगता है कि राज्य सरकारों की निग...
Keywords: कोलख्यान,kolkhyan
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[texts]प्रेम जो हाट बिकाय - प्रफुल्ल कोलख्यान Prafulla Kolkhyan
चित्त की प्रेमावस्था में मनुष्य के लिए कुछ भी अ-देय नहीं रहता है। प्रेम में माता हुआ मनुष्य सबकुछ दे देना चाहता है। प्रेम में माता हुआ मनुष्य एक ऐसे दान योगी की तरह का आचरण करता है जैसे संसार की...
Keywords: कोलख्यान,हाट,kolkhyan; kabir; prem
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[texts]व्यक्ति, समाज और साहित्य - प्रफुल्ल कोलख्यान Prafulla Kolkhyan
समाज द्वारा प्रदत्त साहस की सीमा-रेखा से बाहर जाकर किये जानेवाले आचरण को ही समाज अपराध करार देता है। वस्तुत: समाज विरोधी आचरण का भी एक सामाजिक पहलू होता है। समाज और व्यक्ति का चुंबकीय संबंध दो...
Keywords: kolkhyan,कोलख्यान
Downloads: 87
[texts]दलित राजनीति की समस्याएँ - प्रफुल्ल कोलख्यान Prafulla Kolkhyan
दलित एक विशुद्ध भारतीय स्थिति है और इसीलिए ‘दलित राजनीति की समस्या’ अपने मूल चरित्र में बिल्कुल भारतीय यथार्थ है। दलित का अर्थ और अभिप्राय सिर्फ भारतीय संदर्भ से हासिल किये जा सकते हैं। दलि...
Keywords: दलित,कोलख्यान,kolkhyan
Downloads: 135
[texts]व्यक्ति, समाज और साहित्य - प्रफुल्ल कोलख्यान Prafulla Kolkhyan
असल में व्यक्तित्व समाज का सार होता है। व्यक्तिवाद समाज को कमजोर करता है। जब समाज कमजोर हो तो उसका सार प्रभावशील कैसे बन सकता है? प्रसंगवश, इस समाज के अधिक मूर्त्त और अंतरंग बनाव को ही परिवार क...
Keywords: कोलख्यान,kolkhyan,व्यक्ति
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